वैश्विक बाजार पूंजीकरण रैंकिंग में भारत सातवें स्थान पर खिसका, दक्षिण कोरिया ने छोड़ा पीछे

NEWS SAGA DESK

नई दिल्ली :– पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय शेयर बाजार को बड़ा झटका लगा है। वैश्विक बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) रैंकिंग में भारत अब सातवें स्थान पर पहुंच गया है।

शेयर बाजार परामर्श और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) से पंजीकृत निवेश मंच यूनिवेस्ट के अनुसार, 2 जून तक भारतीय शेयर बाजार वैश्विक इक्विटी बाजार पूंजीकरण रैंकिंग में फिसलकर सातवें स्थान पर आ गया है। इसका प्रमुख कारण कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित प्रौद्योगिकी कंपनियों का तेज उभार और वैश्विक निवेशकों का झुकाव उन बाजारों की ओर बढ़ना है, जहां ऐसी कंपनियों की मजबूत मौजूदगी है।

दक्षिण कोरिया की बाजार पूंजीकरण में तेज बढ़ोतरी

यूनिवेस्ट के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण कोरिया की सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 86 प्रतिशत बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 475 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है। इसके विपरीत भारतीय शेयर बाजार का कुल बाजार पूंजीकरण घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर (करीब 456 लाख करोड़ रुपये) रह गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चिप निर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन ने दक्षिण कोरिया और अन्य तकनीक-प्रधान बाजारों को लाभ पहुंचाया है।

निफ्टी और सेंसेक्स पर दबाव

आंकड़ों के अनुसार, लगातार कमजोर प्रदर्शन के कारण निफ्टी और सेंसेक्स में इस वर्ष अब तक 11 से 13 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के चलते निकट भविष्य में सुधार के संकेत सीमित दिखाई दे रहे हैं।

बाजार पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों का लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना, मई महीने में विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा 55,963 करोड़ रुपये की बिकवाली तथा सामान्य से कमजोर मानसून का अनुमान शामिल हैं।

चौथे स्थान से सातवें स्थान तक का सफर

वर्ष 2024 में भारतीय शेयर बाजार वैश्विक रैंकिंग में चौथे स्थान तक पहुंच गया था। हालांकि इसके बाद वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, विदेशी निवेश में कमी और बाजार की बदलती प्राथमिकताओं के कारण भारत की स्थिति कमजोर हुई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कंपनियों की अपेक्षाकृत कम संख्या ने भारतीय बाजार की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को प्रभावित किया है।

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भारत अब भी मजबूत

बाजार पूंजीकरण रैंकिंग में गिरावट के बावजूद अर्थव्यवस्था के आकार के मामले में भारत की स्थिति मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुमान के अनुसार भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर है, जबकि दक्षिण कोरिया का सकल घरेलू उत्पाद करीब 1.93 ट्रिलियन डॉलर है।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और दीर्घकालिक आर्थिक आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है। ऐसे में बाजार पूंजीकरण रैंकिंग में आई यह गिरावट अल्पकालिक वैश्विक परिस्थितियों का परिणाम मानी जा रही है।

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