पूजा में ढाक की बढ़ी मांग, कलाकारों को मिली बड़ी राहत

पूजा के दौरान डीजे पर सख्ती से ढाक की बढ़ी मांग ने कलाकारों को राहत दी है। मेदिनीपुर से दिल्ली तक बुकिंग मिलने लगी है।

News Saga Desk

पश्चिम बंगाल में पूजा के दौरान डीजे और तेज आवाज वाले माइक पर सख्ती के बीच ढाक की बढ़ी मांग ने पारंपरिक ढाक कलाकारों के चेहरे पर खुशी ला दी है। पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर के कई गांवों में पूजा से पहले ढाक कलाकार तैयारियों में जुट गए हैं। पूजा समितियां डीजे की जगह पारंपरिक ढाक और बैंड पार्टी को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे कलाकारों के साथ वाद्य यंत्र विक्रेताओं को भी इस बार बेहतर कारोबार की उम्मीद है।

पूर्व मेदिनीपुर के शहीद मातंगिनी ब्लॉक के महिषदा, काखदा और बामनआड़ा समेत कई गांव ढाक कलाकारों के लिए जाने जाते हैं। इन गांवों में पूजा का मौसम शुरू होने से पहले ही गतिविधियां तेज हो गई हैं। कोई पुराने ढाक की मरम्मत कर रहा है तो कोई उसकी चमड़ी कसकर सुर ठीक करने में जुटा है। कलाकारों का कहना है कि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में उन्हें अधिक एडवांस मिल रहा है।

डीजे पर सख्ती से बढ़ी ढाक की मांग

पूजा आयोजनों में तेज आवाज वाले डीजे के इस्तेमाल पर प्रशासनिक सख्ती के बीच पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ओर लोगों का रुझान बढ़ता दिखाई दे रहा है। ढाक की बढ़ी मांग का सबसे ज्यादा फायदा उन कलाकारों को मिल रहा है, जिनका पारंपरिक वाद्य यंत्र बजाना ही आय का मुख्य साधन है।

महिषदा गांव के ढाक कलाकार स्वरूप डुलाई ने बताया कि इस बार ढाक और बैंड पार्टी की मांग काफी बढ़ी है। उनके अनुसार, संभवतः डीजे बजाने पर रोक के कारण पूजा समितियां पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ओर लौट रही हैं। स्थिति यह है कि कई कलाकारों के पास इतनी अधिक बुकिंग आ रही है कि वे मांग के बावजूद सभी कार्यक्रमों की बुकिंग स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

मेदिनीपुर के कलाकारों में उत्साह

पश्चिम मेदिनीपुर के ढाक वादक किंकर सिंह ने बताया कि डीजे के बढ़ते चलन के कारण पारंपरिक ढाक कलाकारों के कारोबार पर असर पड़ा था। उनके अनुसार, तेज आवाज वाले डीजे के कारण पूजा के पारंपरिक माहौल में भी बदलाव महसूस किया गया था।

पूजा

अब डीजे पर सख्ती के बाद पूजा समितियां फिर से ढाक की ओर लौट रही हैं। इससे कलाकारों को काम मिलने के साथ पारंपरिक संस्कृति को भी बढ़ावा मिल रहा है। ढाक की बढ़ी मांग कलाकारों के लिए केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि उनकी कला और परंपरा के संरक्षण का अवसर भी बन रही है।

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दूसरे राज्यों से भी मिल रही बुकिंग

इस बार ढाक कलाकारों की मांग केवल पूर्व और पश्चिम मेदिनीपुर तक सीमित नहीं है। कलाकारों के अनुसार, कोलकाता, खड़गपुर, टाटा और जमशेदपुर के अलावा दिल्ली, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से भी बुकिंग मिली है।

गांव के कई कलाकार पूजा के दौरान दूसरे राज्यों में जाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे स्थानीय कलाकारों को अपने जिले से बाहर जाकर काम करने का अवसर भी मिल रहा है। पूजा समितियां पहले से ही कलाकारों और टीमों से संपर्क कर कार्यक्रमों की तारीख तय कर रही हैं।

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