झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गिरिडीह के पीरटांड़ स्थित मधुबन में आयोजित ‘मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन’ को संबोधित किया। आदिवासी समाज के अधिकार, शिक्षा, नशा मुक्ति और संस्कृति के संरक्षण पर जोर।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित मधुबन थाना मैदान में आयोजित भव्य ‘मारांग बुरू धोरोमगाड़ महासम्मेलन’ में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस ऐतिहासिक महासम्मेलन में झारखंड के अलावा असम, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि और आम लोग शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस विशाल जनसमूह को संताली भाषा में संबोधित करते हुए आदिवासी समाज को और अधिक मजबूत, संगठित और प्रगतिशील बनाने का जोरदार आह्वान किया।
आदिवासी समाज के विशिष्ट अधिकार और संविधान
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आदिवासी समाज को विशिष्ट सामाजिक अधिकार प्राप्त हैं, जिन्हें देश के भारतीय संविधान में भी स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश में कई ऐसे संवेदनशील और विशेष क्षेत्र हैं जहां आदिवासी समाज की सहमति और अनुमति के बिना कोई भी कार्य संपन्न नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री ने महासम्मेलन में उपस्थित सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं और समाज को सशक्त बनाने की दिशा में किए जा रहे सकारात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि समाज के सर्वांगीण विकास के लिए सामूहिक सहभागिता और आपसी सहयोग बेहद जरूरी है और सरकार इस दिशा में हरसंभव सहायता प्रदान करेगी।
प्रकृति और ‘मरांग बुरू धोरोमगाड़’ का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पर्यावरण और आस्था के प्रतीक ‘मरांग बुरू धोरोमगाड़’ के संरक्षण को हम सबकी नैतिक जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वज जंगलों में वास करते आए हैं और जंगल ही हमारे लिए रोजगार का मुख्य जरिया होने के साथ-साथ भगवान के समान पूजनीय हैं। आज के समय में इस प्राकृतिक धरोहर और परंपरा की देखभाल करना हम सभी का परम कर्तव्य है।
परंपराओं को समझें युवा और शिक्षा पर दें जोर
युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की दुनिया भले ही विज्ञान और तकनीक के बल पर चांद तक पहुंच गई हो, लेकिन आदिवासी समाज अभी भी शैक्षणिक, बौद्धिक और आर्थिक रूप से कई मायनों में पीछे है। समाज के सच्चे उत्थान के लिए सभी को एकजुट होना होगा। उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनके दिवंगत माता-पिता (दिशोम गुरु शिबू सोरेन और रूपी सोरेन) के जीवन और संस्कारों से उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों को समझा है। आज की युवा पीढ़ी को भी अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संस्कृति और रीति-रिवाजों से भली-भांति अवगत होना चाहिए। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि अलग राज्य बने 25 वर्ष से अधिक हो जाने के बावजूद अभी भी अपेक्षित विकास लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सके हैं, जिसके लिए हम सबको मिलकर भविष्य के विकास पथ पर तेजी से अग्रसर होना होगा।
नशाखोरी के खिलाफ कड़ा संदेश
मुख्यमंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि नशाखोरी वर्तमान समय में आदिवासी समाज को अंदर से खोखला और कमजोर कर रही है। इस बुराई से निपटने के लिए सरकार ‘नशामुक्त जीवन हो हमारा’ जैसे सामूहिक जागरूकता अभियान चला रही है। इसके साथ ही, झारखंड में हड़िया और अवैध शराब के निर्माण व बिक्री पर रोक लगाने के लिए ‘फूलो-झानो आशीर्वाद योजना’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका और स्वरोजगार से जोड़ना है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे नशामुक्त समाज के निर्माण में अपना पूरा सहयोग दें।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कई करीबी और परिजनों के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और आश्वस्त किया कि सम्मेलन में समाज के प्रतिनिधियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन पर न्यायसंगत और सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर विधायक सोमेश सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन, मरांग बुरू बचाओ संघर्ष मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष फागू बेसरा, महासचिव हीरालाल मांझी, जिला अध्यक्ष महावीर मुर्मू सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इससे पहले पीरटांड़ मधुबन पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
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