हल्दिया के मैत्रीभूमि में 40 हजार LED से जगमगाएगा पंडाल

हल्दिया के मैत्रीभूमि दुर्गापूजा पंडाल में 40 हजार LED बल्ब और एक लाख मीटर राइस लाइट चेन से रोशनी होगी। जानें थीम, प्रतिमा और सामाजिक कार्यक्रमों की खासियत।

News Saga Desk

मेदिनीपुर। पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले की औद्योगिक नगरी हल्दिया में इस वर्ष दुर्गापूजा के दौरान रोशनी का भव्य नजारा देखने को मिलेगा। हल्दिया के हाजरा मोड़ स्थित मैत्रीभूमि सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने इस बार ‘आलोय आलोय आसछे उमा’ यानी ‘रोशनी में आ रही हैं मां उमा’ थीम पर पूजा आयोजित करने की तैयारी की है। इस आयोजन में 40 हजार एलईडी बल्ब और एक लाख मीटर लंबी राइस लाइट चेन से विशाल पंडाल को सजाया जाएगा। 60 फुट ऊंचे पंडाल और अजंता-एलोरा की मूर्तिकला शैली से प्रेरित मां दुर्गा की प्रतिमा को इस वर्ष के प्रमुख आकर्षणों में शामिल किया गया है।

समिति के अनुसार, इस थीम के माध्यम से सत्य, मंगल और सुंदरता की स्थापना का संदेश दिया जाएगा। मां दुर्गा को अशुभ शक्तियों के विनाश और शुभ शक्तियों के आगमन का प्रतीक मानते हुए पंडाल की सजावट में प्रकाश को विशेष महत्व दिया गया है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह आयोजन स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूर-दराज से आने वाले लोगों को भी आकर्षित करेगा।

रोशनी की थीम पर तैयार हो रहा 60 फुट ऊंचा पंडाल

मैत्रीभूमि सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने इस वर्ष पंडाल की विषयवस्तु को रोशनी और सकारात्मकता से जोड़ा है। ‘आलोय आलोय आसछे उमा’ का विचार मां दुर्गा के आगमन को प्रकाश, शुभता और आशा के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है।

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पंडाल को भव्य रूप देने के लिए 40 हजार एलईडी बल्बों के साथ एक लाख मीटर लंबी राइस लाइट चेन का इस्तेमाल किया जा रहा है। रोशनी की व्यापक व्यवस्था से पूरे परिसर को आकर्षक स्वरूप देने की योजना है। 60 फुट ऊंचा पंडाल श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनने वाला है।

पूजा आयोजकों का कहना है कि सजावट का उद्देश्य केवल भव्यता दिखाना नहीं, बल्कि लोगों तक एक सकारात्मक संदेश पहुंचाना भी है। प्रकाश को सत्य और शुभता का प्रतीक मानते हुए इस वर्ष की कलात्मक प्रस्तुति तैयार की जा रही है।

राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कलाकार कर रहे निर्माण

इस विशाल पंडाल का निर्माण राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित कलाकार गौरांग कुइला कर रहे हैं। वह पिछले दो महीने से अपने 30 सहयोगी कलाकारों के साथ निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं। कलाकारों की टीम पंडाल की संरचना से लेकर मूर्तिकला और सजावट तक विभिन्न पहलुओं पर काम कर रही है।

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इस वर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा को अजंता-एलोरा की मूर्तिकला शैली से प्रेरित स्वरूप दिया जा रहा है। भारतीय कला और ऐतिहासिक शिल्प परंपरा की विशेषताओं को ध्यान में रखकर प्रतिमा को आकार दिया जा रहा है। आयोजकों के मुताबिक, प्रतिमा का निर्माण धीरे-धीरे अंतिम रूप की ओर बढ़ रहा है।

पंडाल की ऊंचाई, व्यापक रोशनी और कलात्मक प्रतिमा का संयोजन इस आयोजन को विशिष्ट बनाने की कोशिश है। कलाकारों के लिए इतने बड़े स्तर पर प्रकाश और मूर्तिकला को एक साथ प्रस्तुत करना भी महत्वपूर्ण रचनात्मक कार्य है।

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धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर

मैत्रीभूमि की दुर्गापूजा केवल धार्मिक उत्सव तक सीमित नहीं रहेगी। पूजा समिति ने सामाजिक सेवा को भी आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। इसके तहत जरूरतमंद लोगों के बीच नए वस्त्रों का वितरण किया जाएगा। साथ ही रक्तदान शिविर, थैलेसीमिया जांच और नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित करने की योजना है।

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समिति की ओर से यातायात नियमों के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार यातायात व्यवहार के प्रति जागरूक करना है। इसके अलावा पौधों का वितरण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाएगा।

शिक्षा के क्षेत्र में भी समिति की ओर से पहल की जाएगी। मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने और पुस्तकों का वितरण करने की योजना है। जरूरतमंद लोगों को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पूजा समिति धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहयोग और जनकल्याण की भावना को आगे बढ़ाना चाहती है।

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