अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस विश्व में भारतीय संस्कृति की अनुपम देनयोग को अपनाएं जीवन को सुखमय बनाएं
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष संजय सर्राफ ने कहा है कि हर वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। यह दिन योग के महत्व, इसकी उपयोगिता और इसकी वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक बन चुका है।
भविष्य बताने वाले, वर्तमान से बेखबर?
जब भी आपदा आती है भविष्य बांचने वाले ऑफलाइन मिलते हैं। कई तो यह तक दावा करते हैं कि उनका ‘ऊपर वाले से सीधा संपर्क’ है। ऐसे देववाचक भी हर बड़ी आपदा, दुर्घटना या संकट के समय चुप क्यों हो जाते हैं?
चारधाम यात्रा में मौत के उड़नखटोले!
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में 15 जून को तड़के एक हेलीकॉप्टर (उड़नखटोला) फिर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इस हेलीकॉप्टर में पायलट समेत 7 लोग सवार थे, जिनमें एक 2 वर्ष का बच्चा भी था। इन सभी की मौके पर ही मौत हो गई है। खराब मौसम के कारण यह हादसा गौरीकुंड और त्रिजुगीनारायण के मध्य गौरीकुंड के जंगलों के ऊपर हुआ।
अहमदाबाद में ‘सपनों की उड़ान’ से सुलगते सवाल
अहमदाबाद में 12 जून की सुबह आम दिनों की तरह सामान्य थी। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि आज की दोपहर रुलाने वाली होगी। एअर इंडिया की फ्लाइट ए1-171 लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने कुछ ही सेकंड बाद क्रैश हो गई।
रिश्तों के एटीएम को संभालें, ‘यूजर एग्रीमेंट’ करने से बचें
पिछली सदी में साइकिल की घंटी, सांझ की चौपाल, या आंगन का पीपल रिश्तों की धड़कन होते थे। किसी के दरवाजे पर दो बार दस्तक हुई तो मतलब साफ था-चाय पकाओ, गपशप होने वाली है। आज दरवाजा कम बजता है, मोबाइल ज्यादा। और मोबाइल भी कई बार हाथ में नहीं, डाइनिंग-टेबल पर पड़ा-पड़ा नोटिफिकेशन बजाता है-पैकेज आउट फॉर डिलीवरी।
भारत में गरीबों की घटती संख्या के मायने
किसी भी देश के लिए लोक कल्याणकारी राज्य होने का अर्थ है, उसके द्वारा इस तरह की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाए ताकि वहां निवासरत लोगों के बीच किसी भी तरह की असामनता और अव्यवस्था है, वह दूर हो सके। आर्थिक स्तर पर रोजगार के अवसर इतने सुलभ हों कि वहां से पलायन न होकर प्रत्येक नागरिक एक खुशहाल जीवन जी सके।
कबीर जयंती विशेष…जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय
मध्यकालीन युग के महान कवि संत कबीर दास की 11 जून को जयंती है। इस अवसर पर उनका प्रसिद्ध दोहा याद आता है-” बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय” इसका अर्थ है कि जब मैं दूसरों की बुराई देखने निकला, तो मुझे कोई भी बुरा नहीं मिला।
प्रधानमंत्री मोदी के सेवा, सुशासन और समर्पण के ग्यारह वर्ष
साल 2014 में जब नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब देश एक निर्णायक नेतृत्व की तलाश में था। आर्थिक अनिश्चितता, नीतिगत पंगुता और भ्रष्टाचार के मामलों ने जनता को निराश कर दिया था। ऐसे समय में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी राष्ट्रीय मंच पर एक उम्मीद की किरण बनकर उभरे।
नरेंद्र मोदी : दुर्लभ संकल्प-शक्ति के अतुल्य नायक
सन् 2014 से पूर्व भारतीय जनमानस धीरे-धीरे यह मान बैठा था कि आतंकवाद हमारे भाग्य का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है और इसके विरुद्ध कोई ठोस कदम संभव नहीं। विशेषकर 26/11 के मुंबई हमले ने इस विवशता की भावना को और गहरा कर दिया था।
आतंक के लालगढ़ में लहराने लगा तिरंगा
चार दशक से ज्यादा समय तक नक्सलवाद का शिकार रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले को अब वामपंथी उग्रवादियों (एलडब्ल्यूई) जिले की सूची से बाहर कर दिया गया है। अपने आप में ये बड़ी खबर है। दरअसल नरेन्द्र मोदी सरकार का लक्ष्य है कि मार्च 2026 तक भारत पूरी तरह से नक्सल मुक्त हो जाए।