सुबह की एक अच्छी आदत बदल सकती है आपकी दिनचर्या, वॉक और योग के फायदे जानें
सुबह की अच्छी शुरुआत पूरे दिन के मूड और सक्रियता पर असर डाल सकती है। ऐसे में कई लोग फिट रहने के लिए मॉर्निंग वॉक करते हैं, तो कुछ योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाते हैं। दोनों ही आदतें सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती हैं,
जिम जाने वालों के लिए क्या है बेहतर, सोयाबीन या चिकन? जानें फायदे
आज के समय में फिट रहना और सेहत का ख्याल रखना लोगों की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। कोई नियमित रूप से जिम जाकर वर्कआउट करता है, तो कोई घर पर एक्सरसाइज करके खुद को फिट रखने की कोशिश करता है NEWS SAGA DESK आज के समय में फिट रहना और सेहत का ख्याल रखना लोगों की प्राथमिकताओं में शामिल हो गया है। कोई नियमित रूप से जिम जाकर वर्कआउट करता है, तो कोई घर पर एक्सरसाइज करके खुद को फिट रखने की कोशिश करता है। वहीं, कई लोग वजन घटाने या मांसपेशियां मजबूत बनाने के लिए अपनी डाइट में भी बदलाव करते हैं। इन सभी प्रयासों के बीच प्रोटीन का महत्व काफी बढ़ गया है। प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों के निर्माण और मरम्मत के साथ-साथ कई जरूरी शारीरिक प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि फिटनेस पर ध्यान देने वाले लोग अपनी डाइट में प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करते हैं। नॉन-वेज खाने वालों के लिए चिकन एक लोकप्रिय विकल्प है, जबकि शाकाहारी लोग सोयाबीन, दाल, पनीर और टोफू जैसे खाद्य पदार्थों से प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं। सोयाबीन क्यों है शाकाहारियों के लिए खास सोयाबीन प्रोटीन से भरपूर एक प्रमुख प्लांट-बेस्ड खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन के अलावा फाइबर, आयरन, पोटैशियम और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इसकी खास बात यह है कि इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी नौ आवश्यक अमीनो एसिड मौजूद होते हैं। इसलिए इसे शाकाहारी लोगों के लिए उपयोगी प्रोटीन स्रोत माना जाता है। 1. मांसपेशियों की मजबूती में मदद सोयाबीन में मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों की मरम्मत और उनके विकास में सहायक होता है। नियमित व्यायाम करने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। हालांकि, मांसपेशियां बनाने के लिए पर्याप्त प्रोटीन के साथ संतुलित भोजन, नियमित एक्सरसाइज और अच्छी नींद भी जरूरी है। 2. पाचन और पेट भरा रखने में सहायक सोयाबीन में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज में मदद करता है। फाइबर युक्त भोजन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में भी सहायक हो सकता है। इससे संतुलित डाइट और वजन प्रबंधन में मदद मिल सकती है। 3. दिल की सेहत के लिए उपयोगी विकल्प सोयाबीन में असंतृप्त वसा और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। संतुलित आहार में इसे शामिल करना दिल की सेहत के लिए उपयोगी हो सकता है। हालांकि, हृदय स्वास्थ्य केवल एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर नहीं करता, बल्कि पूरी डाइट और जीवनशैली भी महत्वपूर्ण होती है। 4. बजट में प्रोटीन पाने का विकल्प सोयाबीन कई लोगों के लिए किफायती प्रोटीन विकल्प हो सकता है। खासकर शाकाहारी लोगों के लिए यह कम खर्च में डाइट में प्रोटीन बढ़ाने का एक अच्छा तरीका है। इसे सब्जी, करी या अन्य व्यंजनों के रूप में खाया जा सकता है। चिकन को क्यों माना जाता है हाई-क्वालिटी प्रोटीन? चिकन, विशेषकर बिना त्वचा वाला चिकन ब्रेस्ट, प्रोटीन का अच्छा स्रोत है। इसमें शरीर के लिए जरूरी सभी नौ आवश्यक अमीनो एसिड मिलते हैं। इसमें कार्बोहाइड्रेट बहुत कम होता है और पकाने के तरीके के अनुसार फैट की मात्रा बदल सकती है। 1. मसल्स बनाने और रिकवरी में मदद चिकन में मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों के निर्माण और वर्कआउट के बाद उनकी मरम्मत में मदद करता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले और नियमित व्यायाम करने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करते हैं। 2. वजन प्रबंधन में सहायक प्रोटीन युक्त भोजन खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। ऐसे में बिना त्वचा वाला चिकन संतुलित कैलोरी वाली डाइट का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, वजन घटाने के लिए कुल कैलोरी, शारीरिक गतिविधि और खानपान की आदतें भी मायने रखती हैं। 3. कई जरूरी पोषक तत्वों का स्रोत चिकन में प्रोटीन के साथ विटामिन B6, नियासिन, फॉस्फोरस और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। ये शरीर की ऊर्जा से जुड़ी प्रक्रियाओं और सामान्य कामकाज में भूमिका निभाते हैं। सोयाबीन और चिकन में किसमें ज्यादा प्रोटीन होता है? इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों खाद्य पदार्थ किस रूप में खाए जा रहे हैं। सूखे सोयाबीन में प्रति 100 ग्राम लगभग 35–40 ग्राम प्रोटीन हो सकता है, जबकि पके हुए सोयाबीन में पानी की मात्रा के कारण यह आंकड़ा अलग होता है। दूसरी ओर, 100 ग्राम पके हुए चिकन ब्रेस्ट में आमतौर पर लगभग 30–32 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है। वास्तविक मात्रा उत्पाद और पकाने के तरीके के अनुसार बदलती है। प्रोटीन की गुणवत्ता के लिहाज से चिकन और सोयाबीन दोनों अच्छे विकल्प हैं। चिकन हाई-क्वालिटी पशु-आधारित प्रोटीन देता है, जबकि सोयाबीन संपूर्ण प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का स्रोत है। इसलिए केवल प्रोटीन की मात्रा देखकर किसी एक को सभी लोगों के लिए बेहतर नहीं कहा जा सकता। अपनी डाइट में क्या शामिल करें? अगर आप नॉन-वेज खाते हैं, तो उबला, ग्रिल्ड या कम तेल में पका चिकन आपकी डाइट का हिस्सा हो सकता है। वहीं, शाकाहारी लोग सोयाबीन के साथ टोफू, दाल, छोले, राजमा और पनीर जैसे विकल्पों से भी प्रोटीन प्राप्त कर सकते हैं। सोयाबीन को अच्छी तरह पकाकर खाना बेहतर है। चिकन को भी पूरी तरह पकाना चाहिए और बार-बार डीप फ्राई करने से बचना चाहिए। सबसे जरूरी बात यह है कि आपकी डाइट आपकी उम्र, गतिविधि, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जरूरतों के अनुसार होनी चाहिए। निष्कर्ष: सोयाबीन और चिकन दोनों ही प्रोटीन के उपयोगी स्रोत हैं। सही विकल्प आपकी खानपान की पसंद, बजट और जरूरतों पर निर्भर करता है। फिट रहने के लिए किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित डाइट और नियमित व्यायाम को प्राथमिकता दें।
तंग गलियों से दूर-दराज के गांवों तक पहुंचेगी मदद, रांची को मिलेगी नमो जीवन रक्षक बाइक एम्बुलेंस
आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक तेज और सुलभ बनाने के उद्देश्य से रांची में ‘नमो जीवन रक्षक बाइक एम्बुलेंस’ का लोकार्पण 10 अक्टूबर को सदर अस्पताल में किया जाएगा
वजन घटाने से बेहतर पाचन तक, जानें कितने फायदेमंद हैं चिया सीड्स
आजकल युवा अपनी सेहत और फिटनेस को लेकर पहले से अधिक जागरूक हैं। जिम, योग, एक्सरसाइज और हेल्दी डाइट अब उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन रहे हैं।
गर्म खाना फ्रिज में रखना सही या गलत? जानिए एक्सपर्ट का जवाब
रात का खाना बच जाने पर उसे फ्रिज में रखना आम बात है। लेकिन अक्सर यह सवाल परेशान करता है कि गर्म खाने को सीधे फ्रिज में रखना चाहिए या पहले उसे कमरे के तापमान पर ठंडा होने देना चाहिए। लंबे समय तक खाने को बाहर छोड़ना भी सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि इस दौरान बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट रेटिंग: जानें सबसे हेल्दी दाल कौन सी है, मूंग दाल 9.5/10 के साथ शीर्ष पर
गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्स्य के अनुसार मूंग दाल 9.5/10 रेटिंग के साथ सबसे हेल्दी दाल है। जानें मसूर, अरहर, चना, उड़द दाल और राजमा के फायदे एवं उनकी डॉक्टर रेटिंग।
बदलते मौसम में बालों ने छोड़ा साथ? इन आसान टिप्स से रखें बालों का ख्याल
मौसम में बदलाव का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि बालों और स्कैल्प पर भी पड़ सकता है। तापमान और नमी में बदलाव के कारण बालों की प्राकृतिक नमी प्रभावित हो सकती है। इसका असर बालों के रूखेपन, टूटने, डैंड्रफ और स्कैल्प में खुजली के रूप में दिखाई दे सकता है NEWS SAGA DESK मौसम में बदलाव का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि बालों और स्कैल्प पर भी पड़ सकता है। तापमान और नमी में बदलाव के कारण बालों की प्राकृतिक नमी प्रभावित हो सकती है। इसका असर बालों के रूखेपन, टूटने, डैंड्रफ और स्कैल्प में खुजली के रूप में दिखाई दे सकता है। ऐसे में मौसम के अनुसार Hair Care Routine में कुछ छोटे बदलाव करना फायदेमंद हो सकता है। स्कैल्प की सफाई पर दें ध्यान बदलते मौसम में धूल, पसीना और प्रदूषण स्कैल्प पर जमा हो सकते हैं। इससे खुजली और रूसी जैसी समस्या बढ़ सकती है। इसलिए बालों को अपनी जरूरत के अनुसार हल्के शैंपू से साफ करते रहना चाहिए। हालांकि, जरूरत से ज्यादा शैंपू करने से बालों की प्राकृतिक नमी कम हो सकती है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने स्कैल्प और बालों की स्थिति के हिसाब से हेयर वॉश की फ्रीक्वेंसी तय करनी चाहिए। बहुत गर्म पानी से बाल धोने से बचें ठंड के मौसम में गर्म पानी से नहाना आरामदायक लगता है, लेकिन बहुत गर्म पानी स्कैल्प की नमी को कम कर सकता है। इससे बाल अधिक रूखे महसूस हो सकते हैं। बाल धोने के लिए सामान्य या हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल बेहतर विकल्प हो सकता है। शैंपू के बाद कंडीशनर लगाने से बालों की लंबाई और सिरों में नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। तेल की हल्की मालिश करें बाल धोने से पहले हल्के हाथों से तेल की मालिश की जा सकती है। इससे स्कैल्प और बालों को कंडीशन करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अगर स्कैल्प बहुत ऑयली है या डैंड्रफ की समस्या है, तो जरूरत के अनुसार ही तेल का इस्तेमाल करें। गीले बालों को जोर से न रगड़ें गीले बाल आसानी से टूट सकते हैं। इसलिए बाल धोने के बाद उन्हें तौलिए से जोर-जोर से रगड़ने के बजाय धीरे से पानी सोखें और संभव हो तो उन्हें प्राकृतिक रूप से सूखने दें। गीले बालों में कंघी करते समय भी सावधानी बरतें। इसके अलावा हेयर ड्रायर, स्ट्रेटनर और कर्लर जैसे हीटिंग टूल्स का बार-बार इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर हीट-प्रोटेक्टेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है
सदर अस्पताल में ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी, मरीज स्वस्थ
सदर अस्पताल रांची में 46 वर्षीय मरीज के जटिल ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी हुई। विशेषज्ञ टीम ने मेनिन्जियोमा का ऑपरेशन कर मरीज को नई उम्मीद दी।
सुबह की धूप को न करें नजरअंदाज, शरीर और दिमाग पर पड़ सकता है असर
सुबह की शुरुआत अगर प्राकृतिक रोशनी के साथ हो तो यह आपकी रोजाना की दिनचर्या के लिए अच्छी आदत साबित हो सकती है। सुबह का शांत और खुला वातावरण मन को तरोताजा करने के साथ शरीर को प्राकृतिक रोशनी भी देता है।
पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे, रांची में लगा मुफ्त हेल्थ कैंप
रांची के बांधगाड़ी दीपाटोली में पीएम नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित हुआ, जिसमें 110 लोगों की जांच की गई।