दुर्गा पूजा फर्जी पास घोटाला: इंद्रनील सेन को ईडी का समन

दुर्गा पूजा फर्जी पास घोटाले में ईडी ने पूर्व मंत्री इंद्रनील सेन को तलब किया है। 16 घंटे की छापेमारी के बाद 60 करोड़ रुपये की कथित ठगी की जांच तेज हुई।

News Saga Desk

कोलकाता में दुर्गा पूजा के नाम पर कथित फर्जी पास बेचने और करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच तेज हो गई है। दुर्गा पूजा फर्जी पास घोटाले में पश्चिम बंगाल के पूर्व पर्यटन मंत्री और गायक इंद्रनील सेन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके आवास पर 16 घंटे से अधिक समय तक चली छापेमारी और तलाशी अभियान के बाद ईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया है। जांच एजेंसी ने बुधवार सुबह 11 बजे कोलकाता के साल्ट लेक स्थित अपने कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया था। हालांकि, खबर लिखे जाने तक सेन पूछताछ के लिए नहीं पहुंचे थे।

इस मामले में ईडी ने मंगलवार को कोलकाता में एक साथ 10 स्थानों पर छापेमारी की थी। इनमें दक्षिण कोलकाता के कस्बा इलाके में स्थित इंद्रनील सेन और उनकी पत्नी मधुछंदा सेन का आवास भी शामिल था। इसके अलावा, पूर्व मंत्री के कुछ करीबी रिश्तेदारों और इवेंट मैनेजर अरिजीत दासगुप्ता के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई। जांच का मुख्य केंद्र यूनेस्को के नाम और लोगो का कथित दुरुपयोग कर दुर्गा पूजा के प्रीव्यू शो और पूजा परिक्रमा के लिए महंगे प्रवेश पास बेचने का मामला है।

16 घंटे की छापेमारी के बाद ईडी का समन

दुर्गा पूजा फर्जी पास घोटाले की जांच के सिलसिले में ईडी की विभिन्न टीमों ने मंगलवार को कोलकाता के 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान कस्बा स्थित इंद्रनील सेन के आवास पर भी अधिकारियों ने लंबी पूछताछ और तलाशी की प्रक्रिया पूरी की। यह अभियान 16 घंटे से अधिक समय तक चला।

छापेमारी के अगले चरण में जांच एजेंसी ने पूर्व मंत्री को पूछताछ के लिए समन जारी किया। उन्हें बुधवार सुबह 11 बजे साल्ट लेक स्थित ईडी कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। जांच एजेंसी उनसे कथित फर्जी पास की बिक्री, संबंधित संगठन की भूमिका और इस पूरे मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन के बारे में जानकारी हासिल कर सकती है।

हालांकि, समन जारी होने के बाद भी निर्धारित समय तक उनके ईडी कार्यालय नहीं पहुंचने की जानकारी सामने आई। फिलहाल पूछताछ और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

यूनेस्को के नाम पर फर्जी पास बेचने का आरोप

इस पूरे मामले में यूनेस्को के नाम और लोगो के कथित दुरुपयोग को लेकर जांच की जा रही है। वर्ष 2021 में कोलकाता की दुर्गा पूजा को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने के बाद इस मामले से जुड़े घटनाक्रम शुरू होने का आरोप है।

दुर्गा पूजा

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इसके बाद ‘मास आर्ट’ नामक एक संगठन बनाया गया था। आरोप है कि इस संगठन ने खुद को यूनेस्को का आधिकारिक भागीदार बताकर लोगों को दुर्गा पूजा के विशेष दर्शन और परिक्रमा के लिए प्रवेश पास उपलब्ध कराने का दावा किया था।

आरोपों के मुताबिक, संगठन ने कोलकाता के लगभग 24 दुर्गा पूजा पंडालों के प्रीव्यू शो के लिए पास बेचे। इन पासों की कीमत 1,749 रुपये से लेकर 5,499 रुपये तक रखी गई थी। लोगों को कथित तौर पर यह बताया गया कि संबंधित पूजा पंडालों का चयन यूनेस्को ने किया है। हालांकि, जांच में अब तक इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है।

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60 करोड़ रुपये की कथित ठगी की जांच

दुर्गा पूजा फर्जी पास घोटाले में शुरुआती जांच के दौरान करीब 60 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का अनुमान लगाया गया है। जांच एजेंसी पास की बिक्री, पंजीकरण और उससे प्राप्त धनराशि के पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।

उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में इन पासों के लिए करीब 19 हजार लोगों ने पंजीकरण कराया था। वर्ष 2023 में यह संख्या बढ़कर लगभग 34 हजार और 2024 में करीब 61 हजार हो गई। लगातार बढ़ते पंजीकरण के आधार पर जांच एजेंसी इस बात का पता लगाने में जुटी है कि पास की बिक्री से कितनी रकम जुटाई गई और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।

इस मामले में इंद्रनील सेन की पत्नी मधुछंदा सेन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि वह मास आर्ट संगठन के कामकाज से निकटता से जुड़ी हुई थीं। हालांकि, जांच पूरी होने तक किसी भी आरोप को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

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